
एक छोटे से गाँव में पीहु नाम का एक बच्चा रहता था।
पीहु को पतंग उड़ाना बहुत पसंद था।
एक दिन उसने अपनी सबसे प्यारी नीली पतंग निकाली और बोला,
“आज तो इसे सबसे ऊपर ले जाऊँगा!”
पीहु खेत में भागकर गया।
धूप सही थी, आसमान साफ था, बस एक दिक्कत थी —
हवा बहुत तेज चल रही थी।
पीहु ने पतंग ऊपर की।
पतंग ऊपर गई, लेकिन धप्प! एक झटका आया और पतंग टेढ़ी हो गई।
पीहु नाराज़ होकर बोला,
“ये हवा ही खराब है! कुछ करने ही नहीं देती!”
तभी पास खड़े बुज़ुर्ग पतंगबाज़ चाचा हरी बोले,
“अरे पीहु, पतंग हवा से नहीं लड़ती…
हवा का सहारा लेती है।”
पीहु ने सोचा — “सहारा? लेकिन हवा तो तेज है!”
चाचा मुस्कुराए,
“जिस चीज़ से तुम डर रहे हो, वही तुम्हें ऊपर ले जा सकती है…
बस तुम्हारा हाथ मज़बूत होना चाहिए।”
पीहु ने फिर कोशिश की।
इस बार पतंग हिली-डुली, नीचे भी आई…
लेकिन पीहु ने डोर कसकर पकड़ी और छोड़ी नहीं।
कुछ ही पलों में…
पतंग आसमान में सबसे ऊपर थी!
पीहु खुशी से चिल्लाया,
“चाचा! आप सही थे… हवा दुश्मन नहीं, मददगार निकली!”
चाचा हँसते हुए बोले,
“ज़िंदगी भी ऐसी ही है बेटा —
मुश्किलें हवा की तरह होती हैं।
डरोगे तो गिरोगे…
सँभलोगे तो वही तुम्हें ऊपर ले जाती हैं।”
—
सीख (Moral)
मुश्किलों से मत भागो, उनका सहारा लेकर आगे बढ़ो।
चुनौतियाँ तुम्हें गिराती नहीं… कई बार ऊपर उठाती हैं।
अपनी डोर (हिम्मत) मजबूत रखो।
Discover more from The Raghav Verse
Subscribe to get the latest posts sent to your email.