नादान मिट्ठू तोते की यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि बिना सोचे-समझे किसी की बात नहीं माननी चाहिए और मीठी बातों में नहीं फँसना चाहिए।

बहुत समय पहले की बात है। एक हरा-भरा, सुंदर और रंग-बिरंगा जंगल था। उस जंगल में ऊँचे-ऊँचे पेड़, मीठे फल, ठंडी नदियाँ और तरह-तरह के जानवर रहते थे।
उसी जंगल के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था। उसी पेड़ पर रहता था एक हरा, चमकीले पंखों वाला तोता — मिट्ठू।
मिट्ठू देखने में बहुत प्यारा था, लेकिन वह उतना ही नादान और जल्दबाज़ भी था। वह बिना सोचे-समझे किसी की भी बात मान लेता था।

मिट्ठू को नई-नई बातें सुनने में बहुत मज़ा आता था। कोई कुछ भी कह दे, वह तुरंत उड़ पड़ता। बूढ़ा उल्लू अक्सर समझाता,“बेटा मिट्ठू, उड़ने से पहले सोचना बहुत ज़रूरी है।” लेकिन मिट्ठू हँसकर कह देता, “ज़िंदगी मज़े के लिए है, सोच-विचार बाद में!

एक दिन शरारती बंदर गुड्डू बोला, “मिट्ठू! नदी के पास सोने जैसे चमकते दाने पड़े हैं।” मिट्ठू तुरंत उड़ गया। वहाँ जाकर देखा – काँच के टुकड़े धूप में चमक रहे थे। जैसे ही उसने चोंच से उठाया, उसे दर्द हुआ। कछुआ बोला, “बेटा, हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती।” मिट्ठू को अपनी गलती समझ आई।

कुछ दिनों बाद एक चालाक लोमड़ी आई। वह बोली,“प्यारे मिट्ठू, तुम जंगल के सबसे समझदार तोते हो।” मिट्ठू खुश हो गया, लेकिन तभी उसे उल्लू और कछुए की बातें याद आ गईं। उसने सोचा और रुक गया। बाद में पता चला कि लोमड़ी जानवरों को फँसाने आई थी।

एक दिन तेज़ आँधी आई और मिट्ठू का घोंसला टूट गया। वह बहुत डर गया। तभी गिलहरी, खरगोश, कबूतर और कौआ आए। सबने मिलकर नया घोंसला बनाया। मिट्ठू की आँखों में खुशी के आँसू थे। “असली दौलत दोस्त होते हैं।

अब मिट्ठू पहले जैसा नादान नहीं रहा। वह सोच-समझकर फैसले लेने लगा। बूढ़ा उल्लू बोला, “अब तुम सच में समझदार हो गए हो।” मिट्ठू मुस्कुराया, “गलतियाँ करना बुरा नहीं, उनसे सीख न लेना नादानी है।”
🌱 कहानी की सीख
- बिना सोचे किसी की बात नहीं माननी चाहिए
- हर चमकती चीज़ अच्छी नहीं होती
- मीठी बातों से सावधान रहना चाहिए
- सच्चे दोस्त मुश्किल समय में साथ देते हैं
- गलती से सीखना ही समझदारी है
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