बच्चों के लिए एक चटपटी और मजेदार कहानी – चालाक बंदर और जादुई लड्डू। दोस्ती, मिल-जुलकर काम करने और सीख से भरी 5–6 सीन की रोचक कहानी।
जंगल की शरारत

हरे-भरे जंगल में मिट्ठू नाम का एक शरारती बंदर रहता था। उसे लड्डू बहुत पसंद थे और वह हमेशा कुछ नया करने की सोचता रहता था।
जादुई लड्डू की खबर

एक दिन जंगल में खबर फैली कि पहाड़ी के ऊपर एक जादुई लड्डू है, जिसे खाने से कोई भी बहुत समझदार बन जाता है।
अकेले चलने की ज़िद

मिट्ठू ने मन ही मन सोचा,
“इस जंगल में मुझसे तेज़ कोई नहीं।” वह अकेले ही पहाड़ी की ओर चल पड़ा, बिना किसी की बात सुने।
मुसीबत में मिट्ठू

रास्ते में मिट्ठू कीचड़ में फिसल गया और फँस गया। वह ज़ोर-ज़ोर से मदद के लिए चिल्लाने लगा।
दोस्तों की मदद

तोता, खरगोश और हाथी राजा आए और सबने मिलकर मिट्ठू को बाहर निकाला।
असली जादू

मिट्ठू ने जादुई लड्डू सबमें बाँट दिया। सभी समझ गए कि असली जादू साथ रहने में है।
(सीख):
मिलकर काम करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।मिट्ठू समझ गया कि लड्डू जादुई नहीं था,
बल्कि दोस्तों का साथ ही असली जादू था।
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