Ek majedar & prerak kahani jisme kabhi na haar maanne ke bare me bataya gaya hai
एक समय की बात है, एक घने जंगल में चिटकू नाम की एक छोटी, भूरी गिलहरी रहती थी। चिटकू बहुत शरारती और फुर्तीली थी, लेकिन उसका एक सबसे बड़ा सपना था – उड़ने का!
बाकी सभी गिलहरियाँ, जैसे गोलू, मोलू और भोलू, उसे देखकर हँसते थे। वे कहते थे, “अरे चिटकू! तुम एक गिलहरी हो, पक्षी नहीं! गिलहरियाँ उछलती हैं, उड़ती नहीं!”
लेकिन चिटकू किसी की बात नहीं सुनता था। वह रोज़ सुबह एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ता और बादलों को देखता। वह सोचता, “काश, मेरे पास भी पंख होते!”
एक दिन, चिटकू ने फैसला किया कि वह खुद ही उड़ेगा।
साहसिक योजना
चिटकू ने जंगल में गिरी हुई सबसे बड़ी और मज़बूत पत्तियाँ इकट्ठी कीं। फिर उसने अपने नुकीले दाँतों से उन्हें एक-दूसरे से बाँधना शुरू किया। यह एक मुश्किल काम था, लेकिन चिटकू ने हार नहीं मानी। वह दिन-रात काम करता रहा, अपनी योजना को किसी को बताए बिना।
तीन दिन बाद, उसने पत्तों से बनी एक चीज़ तैयार कर ली, जो कुछ-कुछ छोटे-से पतंग जैसी दिखती थी।
अगले दिन, सूरज की पहली किरण के साथ, चिटकू जंगल के सबसे ऊँचे पेड़, जिसे ‘ऊँचाई का राजा’ कहा जाता था, उसकी चोटी पर पहुँच गया। बाकी सभी जानवर और पक्षी नीचे इकट्ठा हो गए। वे सब सोच रहे थे कि आज चिटकू क्या करने वाला है।
पहला प्रयास
चिटकू ने अपनी पत्तों वाली ‘पतंग’ को अपनी पीठ से बाँधा। उसने गहरी साँस ली, आँखों को कसकर बंद किया, और “मैं उड़ सकता हूँ!” चिल्लाते हुए पेड़ से छलांग लगा दी!
धड़ाम!
चिटकू कुछ ही पलों में ज़मीन पर आ गिरा। उसकी पत्तों वाली पतंग भी टूट गई। वह थोड़ा घायल हुआ, लेकिन उसे ज़्यादा चोट नहीं आई।
सभी जानवर फिर से हँसने लगे। “हमने कहा था न!” गोलू ने मज़ाक उड़ाया।
चिटकू उदास हो गया। वह सोचने लगा, “शायद वे सही कह रहे थे।”
✨ प्रेरणा का पल
तभी, एक बुद्धिमान उल्लू बाबा उसके पास आए। उल्लू बाबा ने धीरे से कहा, “बच्चे, तुम गिरे, इसका मतलब यह नहीं कि तुम नहीं उड़ सकते। इसका मतलब यह है कि तुम्हें अलग तरीके से कोशिश करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “असफलता का मतलब है कि तुमने प्रयास किया। यह अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत है।“
उल्लू बाबा की बात सुनकर चिटकू की आँखों में फिर से चमक आ गई।
उसने फिर से काम शुरू किया। इस बार उसने पत्तों के बजाय, हल्की टहनियों और बड़े, चिकने बीजों का इस्तेमाल किया, जिससे उसकी ‘पतंग’ और मज़बूत, लेकिन वज़न में हल्की हो गई। उसने उल्लू बाबा से हवा की दिशा और संतुलन के बारे में भी सीखा।
磊 जीत का उड़ान
अगले सप्ताह, चिटकू फिर से ‘ऊँचाई के राजा’ पेड़ पर पहुँचा। इस बार वह शांत और आत्मविश्वासी था।
उसने हवा की दिशा जाँची। उसने अपनी नई, बेहतर ‘पतंग’ को पीठ पर बाँधा।
इस बार जब उसने छलांग लगाई, तो वह गिरा नहीं! वह हवा में फिसला! उसकी ‘पतंग’ ने उसे ज़मीन पर गिरने से बचा लिया। चिटकू हवा में गोल-गोल घूमते हुए नीचे आया, जैसे वह हवा में स्लाइड कर रहा हो। वह ‘उड़ा’ तो नहीं, लेकिन उसने हवा में ‘ग्लाइड’ किया और कुछ देर तक हवा में रहा!
जब वह सुरक्षित रूप से ज़मीन पर उतरा, तो सभी जानवर और पक्षी तालियाँ बजाने लगे।
गिलहरी गोलू ने कहा, “तुमने सचमुच कर दिखाया, चिटकू! तुम पहले गिलहरी हो जिसने हवा में इतनी दूर तक यात्रा की!”
樂 सीख
बच्चों, इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि:
- अपने सपनों पर विश्वास रखो, चाहे दूसरे क्या भी कहें।
- गिरने से मत डरो। हर असफलता एक नया पाठ सिखाती है।
- कोशिश करते रहो। यदि एक तरीका काम नहीं करता, तो दूसरा तरीका ढूंढो।
- प्रयास करने वाला हमेशा जीतने वाले से ज़्यादा मज़ेदार होता है!
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