“बाज़ार का भूत, घर का सुपरफूड!”

Jhilmilpur नाम के गाँव में तीन बच्चे रहते थे—
रोहन, गुड़िया और चीकू।

तीनों को एक ही दिक्कत थी—
घर का खाना देखते ही भाग जाते!
और बाज़ार का खाना?
उसे देखकर उनकी आँखों में चमक आ जाती!

सामोसा दिखते ही मुँह में पानी…
मोज़ के आते ही तीनों बाइक से भी तेज़ दौड़ पड़ते!

एक दिन की गड़बड़

सुबह माँ ने गरम-गरम दाल-चावल बनाए। रोहन बोला, “माँ, मेरा पेट भरा है!”गुड़िया बोली, “मैं तो आज सिर्फ नूडल्स खाऊँगी!”चीकू बोला, “मैं बाज़ार जा रहा हूँ, आज टिक्की डे है!”माँ ने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा,“एक दिन तुम्हें समझ आएगा, घर का खाना ही असली सुपरपावर है!”तीनों हँस पड़े।

जादुई घटना

शाम को तीनों बाज़ार में नूडल्स और चाट खा रहे थे।
तभी हवा में अजीब सी धूल घूमी…और उनके सामने आ गया — “भूूूख भूत!”मोटू सा, गोल-मटोल, हाथ में चम्मच लिए खड़ा था।भूत बोला,“जो बच्चे घर का खाना नहीं खाते,
उन्हें मैं एक SPECIAL TRIP पर ले जाता हूँ!”तीनों जादुई जंगल में पहुँच गए।

 जंगल का धमाल

उस जंगल में…पेड़ों पर पिज्ज़ा उग रहा था ,फूलों से नूडल्स लटक रहे थे ,ज़मीन से बर्गर निकल रहे थे ,नाले में सेवइयाँ बह रही थीं और आसमान में गोलगप्पे उड़ रहे थे!

तीनों चिल्लाए —
“WOWWWW!!”वे बस खाते ही गए।लेकिन फिर…रोहन का पेट ढोल की तरह “धम-धम” बजने लगा ,गुड़िया के पैर अपने-आप नाचने लगे ,चीकू की आवाज़ चिपमंक जैसी हो गई!भूत हँसने लगा,“ज्यादा बाहर का खाओगे, तो यही होगा!स्वाद तो मिलता है, ताकत नहीं!”

❤️ घर का खाना — Superpower

तभी एक चमचमाती स्वाद परी आई।वो एक थाली लाई—
गरम रोटी, सब्ज़ी, दाल और चावल।तीनों ने एक-एक कौर खाया…पेट ठीक ,पैर ठीक ,आवाज़ ठीक और सारी ऊर्जा वापस! परी बोली,“घर का खाना तुम्हें strong बनाता है।
बाज़ार का खाना सिर्फ कभी-कभी treat के लिए।”


तीनों वापस घर पहुँच गए।

 अगली सुबह — जादूमाँ जैसे ही रोटी लाई—

माँ जैसे ही रोटी लाई—रोहन बोला: “माँ, आज एक extra रोटी देना।” गुड़िया बोली: “मेरे टिफिन में सब्ज़ी ज़्यादा डालना।”चीकू बोला: “आज बाज़ार मत चलना… घर का खाना best है!”

माँ खुश हो गई।

⭐ कहानी का संदेश

घर का खाना रोज़ खाओ,
बाज़ार का खाना सिर्फ कभी-कभी।
स्वाद से ज़्यादा स्वास्थ्य ज़रूरी होता है।

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